Hari Shankar Aggarwal vs The State Of Rajasthan
- SCC(2021) 17 SCC 809
- Neutral2021 INSC 176
- SCR[2021] 2 SCR 1005
Ratio decidendi
The rule this decision rests on
Where a company has nominated a director under Section 17 of the Prevention of Food Adulteration Act, 1954, the person whose nomination is recorded by the local health authority is the responsible person against whom cognisance may be taken under Sections 7/16 of that Act; a person named by the commercial tax department as the nominal proprietor but not recorded as the nominated director by the health authority cannot be prosecuted under those sections. A nomination form submitted to the chief medical officer on the company's letterhead in the prescribed form (Form VIII under Rule 12-B) may not be rejected merely on the ground that it was submitted on the company's letterhead rather than official stationery, provided it was properly sent and received; the substance of the proper submission and receipt of the nomination form in the correct prescribed form cannot be defeated by objections to the mode of its transmission.
Written by Miss Lucy from the judgment below, not taken from a headnote.
Judgment
As delivered
2021 INSC 176 'प्रति वेद्य'
भार का सव च्च्च न्यायालय
दांति क अपीलीय क्षेत्राति कार
दाण्डि क अपीलीय संख्या 297/2021
(विवशेष अवकाश याति*का (दांति क)संख्या 5042/2018 से उत्पन्न)
हरिर शंकर अग्रवाल अपीलार्थी6(गण)
बनाम
राजस्र्थीान राज्य और एक अन्य प्रति वादी (गण)
आदेश
1.
अनुमति दी गई।
2. अपीलक ाF के विवद्वान अति वक्ता और राजस्र्थीान राज्य की ओर से विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता ॉ. मनीष सिंसघवी को सुना। यह अपील राजस्र्थीान उच्च न्यायालय
द्वारा विदनांक 17.04.2018 को पारिर फैसले और आदेश के खिSलाफ दायर की गई है, जिजसके द्वारा अपीलक ाF द्वारा दायर आपराति क विवविव (याति*का) संख्या
1664/2018 को Sारिरज कर विदया गया र्थीा।
3. इस अपील को विवविनतिY करने के खिलए आवश्यक संतिक्षप्त थ्य इस प्रकार
हैंः- ओसवाल ट्रे सF शॉप पर विदनांक 02.03.2002 को विकए गए विनरीक्षण के आ ार पर अपरा अं गF Sाद्य अपविमश्रण विनवारण अति विनयम, 1954 की
ारा7/16 के ह ति*विकत्सा और स्वास्थ्य विवभाग, (राजस्र्थीान) द्वारा एक परिरवाद
1 दजF विकया गया र्थीा। इस परिरवाद में यह दावा विकया गया र्थीा विक वाणिणण्डिज्यक कर
विवभाग, जयपुर से प्राप्त सू*ना के आ ार पर फमF का नाविम व्यविक्त हरिर शंकर अग्रवाल पुत्र श्री वासुदेव प्रसाद अग्रवाल है, इसखिलए उसे पक्षकार बनाया गया है ।
अनुछेद 11 में आगे कहा गया है विक स्र्थीानीय स्वास्थ्य अति कारी, मर्थीुरा से प्राप्त जानकारी के अनुसार मेससF भोला बाबा विमल्क फू उद्योग के विनदेशक देवेंद्र सिंसह
भदौरिरया हैं, जिजसे भी पक्षकार के रूप में शाविमल विकया गया। राजस्र्थीान के झालवाड़ के न्यातियक मजिजस्ट्रेट ने इस मामले में अपरा का संज्ञान खिलया और विदनांक
04.08.2003 के आदेश द्वारा समन जारी विकया। विदनांक 04.08.2003 के आदेश के खिSलाफ, अपीलक ाF-हरिर शंकर अग्रवाल ने आपराति क मामला संख्या
17/2017 दायर विकया, जिजसमें विन*ली अदाल के विदनांक 04.08.2003 के आदेश को *ुनौ ी दी गई र्थीी।
4. अपीलक ाF का वाद यह है विक वह इस फमF में नाविम नहीं र्थीा और देवेंद्र सिंसह भदौरिरया नाम के व्यविक्त को नाविम घोविष विकया गया र्थीा। उसके नामांकन के बारे में
जानकारी पहले से ही मुख्य ति*विकत्सा अति कारी, मर्थीुरा को प्रस् ु की गई र्थीी, जो विदनांक 21. 10. 1995 को उन्हें प्राप्त हो *ुकी र्थीी और अपीलक ाF के विवरुद्ध कोई
आरोप नहीं होने के कारण, अपीलक ाF के विवरुद्ध अपरा का कोई संज्ञान नहीं खिलया जा सक ा र्थीा। विवशेष न्याया ीश ने विदनांक 16.02.2018 को इस याति*का को
Sारिरज कर विदया र्थीा, जिजसके खिSलाफ उच्च न्यायालय में आपराति क विवविव याति*का दायर की गई र्थीी, जिजसे उच्च न्यायालय के आक्षेविप फैसले द्वारा Sारिरज कर विदया
गया है। अपीलक ाF के विवद्व वकील ने संलग्नक पी-2 पर भरोसा कर े कर े हुए, जो विक प्रपत्र VIII में एक जानकारी है, जिजसे विदनांक 21.02.1995 को मुख्य
ति*विकत्सा अति कारी को प्रस् ु विकया गया, विनवेदन कर े हैं की देवेंद्र सिंसह भदौरिरया को नाविम करने वाले प्रपत्र को पत्र विदनांविक 21.02.1995 द्वारा भेजा गया र्थीा,
2 जिजसे मुख्य ति*विकत्सा अति कारी द्वारा विदनांक 21.02.1995 को विवति व प्राप्त विकया
गया र्थीा इसखिलए, अपीलक ाF के खिSलाफ उसको नामांविक विकए जाने का आरोप लगाने वाली णिशकाय का संज्ञान नहीं खिलया जाना *ाविहए र्थीा। यह कर्थीन विकया जा ा
है विक विदनांक 21.10.1995 को मुख्य ति*विकत्सा अति कारी द्वारा विवति व प्राप्त पत्र विदनांविक 21.02.1995 की एक प्रति नी*े की अदाल ों के समक्ष प्रस् ु की गई है
और कणिर्थी दस् ावेज़ से स्पष्ट रूप से यह साविब है विक नामांविक व्यविक्त देवेंद्र सिंसह भदौरिरया र्थीे और देवेंद्र सिंसह भदौरिरया के खिSलाफ ही संज्ञान खिलया जा सक ा र्थीा और
इसखिलए विन*ले न्यायालयों ने अपीलक ाF के दावे को Sारिरज करने में गल ी की है।
5. राज्य की ओर से विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता ॉ. मनीष सिंसघवी विनवेदन कर े हैं
विक दस् ावेज (अनुलग्नक पी-2) विदनांविक 21.02.1995, जिजसकी ामील विकए जाने की विदनांक 21.10.1995 है, के दावे पर विन*ले न्यायालयों द्वारा विवश्वास नहीं
विकया गया है। विवशेष न्याया ीश (एन ीपीएस) झालावाड़, राजस्र्थीान द्वारा विदनांक 16.02.2018 को पारिर आदेश में इस दस् ावेज को स्वीकार न करने के खिलए
कारण विदए गए हैं,इसखिलए, अपीलक ाF के दावे को उति* रूप से Sारिरज कर विदया गया है।
6. हमने पक्षकारों के विवद्वान अति वक्ता की दलीलों पर विव*ार विकया है और रिरकॉ F का अवलोकन विकया है। इससे पहले विक हम आगे बढ़ें और पक्षकारों के
संबंति कz की जां* करें, हमें परिरवाद के अनुछेद 10 और 11 को पुन: प्रस् ु करने की आवश्यक ा है जो विनम्नखिलखिS हैं:
"10 यह विक मैससF फलोदी ट्रेडिं ग कंपनी द्वारा भोले बाबा विमल्क फू इं स्ट्री, 181,सिंस ी कॉलोनी से Sरीदा गया कृष्णा ब्रां घी, जिजसकी विबल संख्या 3074
विदनांविक 05/03/2002 है, को प्रस् ु विकया गया र्थीा, जिजससे यह स्पष्ट है विक
3 मैससF फलोदी ट्रेडिं ग कंपनी ने उक्त फमF से घी की Sरीद की है। वाणिणण्डिज्यक कर
विवभाग, जयपुर से प्राप्त सू*ना के अनुसार उक्त फमF के नामांविक व्यविक्त श्री हरिर शंकर अग्रवाल पुत्र वासुदेव अग्रवाल हैं, इसखिलए उन्हें भी पक्षकार बनाया गया है।
11. यह विक ति ब्बों पर भोले बाबा विमल्क फू इं स्ट्री, आगरा के रूप में लेबल विकया गया र्थीा और उक्त फमF को ब भी कई पत्र विदए गए र्थीे, जिजसमें फमF के बारे में कोई भी
जानकारी अस्वीकार नहीं की गई र्थीी। स्र्थीानीय स्वास्थ्य अति कारी, मर्थीुरा से प्राप्त जानकारी के अनुसार भोले बाबा विमल्क फू इं स्ट्री के विनदेशक देवेंद्र सिंसह भदौरिरया
पुत्र राम सेवक सिंसह भदौरिरया विनवासी हनुमान नगर, फ ेहाबाद, जिजला आगरा को पक्षकार बनाया गया है।"
7.Sाद्य अपविमश्रण अति विनयम, 1954, की ारा 17 के अनुसार, कंपनी द्वारा स्र्थीानीय स्वास्थ्य प्राति करण को Sं 17 (2) के ह नोविटस ऐसे रूप में और ऐसे
रीके से विदया गया है, जैसा विक विन ाFरिर विकया गया है,विक उसने विनदेशक की खिलखिS सहमति से ऐसे विनदेशक या प्रबं क को नाविम विकया है जो जिजम्मेदार व्यविक्त
है। जब हम परिरवाद के अनुछेद 10 पर गौर कर े हैं, ो यह स्पष्ट रूप से उल्लेS विकया गया है विक वाणिणण्डिज्यक कर विवभाग, जयपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार
नाविम व्यविक्त हरिर शंकर अग्रवाल हैं, जबविक परिरवाद के अनुछेद 11 में, यह उल्लेS विकया गया है विक स्र्थीानीय स्वास्थ्य अति कारी, मर्थीुरा से प्राप्त जानकारी के अनुसार,
विनदेशक देवेंद्र सिंसह भदौरिरया हैं। ारा 17 के ह नामांकन स्र्थीानीय स्वास्थ्य अति कारी को देना हो ा है, णिशकाय के अनुसार ही स्र्थीानीय स्वास्थ्य अति कारी से
प्राप्त जानकारी के आ ार पर वह देवेंद्र सिंसह भदौरिरया हैं। णिशकाय में उपरोक्त बयान स्वयं अपीलक ाF के मामले को साविब कर ा है विक देवेंद्र सिंसह भदौरिरया के नामांकन
की जानकारी पत्र विदनांविक 21.02.1995 द्वारा प्रस् ु की गई र्थीी, जो विदनांक 21.10.1995 को प्राप्त हुई र्थीी।
4
8. अब, ॉ. मनीष सिंसघवी, राज्य की ओर से विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता,द्वारा
प्रस् ु कारणों पर आ े हुए, विक दस् ावेज विदनांक 21.02.1995 का है, जबविक मैससF भोले बाबा विमल्क फू उद्योग को विदनांक 06.03.1995 को विनगविम विकया
गया र्थीा और इसका प्रस् ाव दायर विकया गया र्थीा। इसखिलए, जिजस ारीS को नामांविक विकया गया र्थीा, उसके बारे में सबू का भार अपीलक ाF पर है। विवशेष
न्याया ीश की उपरोक्त विटप्पणी विकसी भी रह से नामांकन पत्र के प्रस् ु ीकरण को नकार ी नहीं है, जो मुख्य ति*विकत्सा अति कारी, मर्थीुरा को विदनांक 21.10.1995 को
प्राप्त हुआ र्थीा। कंपनी के विनगमन के बाद और विदनांक 06.03.1995 को संदर्भिभ प्रस् ाव के बाद ही सू*ना प्राप्त हुई र्थीी। विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता ॉ. मनीष सिंसघवी यह
भी विनवेदन कर े हैं विक नामांकन प्रपत्र कंपनी के लेटर हे में जारी विकया गया र्थीा, जिजस पर नहीं भेजा जाना *ाविहए र्थीा।
9. हमने पेपर बुक के पृष्ठ 18 पर नामांकन प्रपत्र का अवलोकन विकया है, जिजसमें फॉमF VIII (विनयम 12-बी) का स्पष्ट उल्लेS है।
10. प्रति वादी के विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता का यह विनवेदन विक नामांकन प्रपत्र लेटर हे पर नहीं भेजे जा सकने की बा ग्राह्य नहीं है। जब नामांकन फॉमF 8 में र्थीा और
विवति व भेजा और प्राप्त विकया गया र्थीा, ो इसे इस आ ार पर Sारिरज नहीं विकया जा सक ा है विक इसे कंपनी के लेटर हे पर भेजा गया र्थीा। जैसा विक ऊपर कहा गया
है, परिरवाद के प्रकर्थीन स्पष्ट रूप से इंविग कर े हैं विक स्र्थीानीय स्वास्थ्य प्राति करण के पास यह देवेंद्र सिंसह भदौरिरया का नाम ही र्थीा। इसखिलए वही कंपनी के मामलों के
खिलए जिजम्मेदार र्थीा और हरिर शंकर अग्रवाल के संदभF की कोई प्रासंविगक ा नहीं र्थीी, जिजनके नाम को वाणिणण्डिज्यक कर विवभाग द्वारा सूति* विकया गया र्थीा।
5
11. पूवFगामी कारणों को ध्यान में रS े हुए, हमारा विव*ार है विक उच्च न्यायालय के
सार्थी-सार्थी विवद्व विवशेष न्याया ीश ने अपीलक ाF के मामले को अस्वीकार करने में गल ी की। यह भी ध्यान देने योग्य है विक परिरवाद में व F मान अपीलक ाF के खिSलाफ
कोई विवणिशष्ट आरोप नहीं है, इसके अलावा विक उसे एक नामांविक व्यविक्त के रूप में अणिभयोजिज विकया जा रहा र्थीा। इस प्रकार, हमारा विव*ार है विक Sाद्य अपविमश्रण
विनवारण अति विनयम, 1954 की ारा 7/16 के ह अपरा के खिलए अपीलक ाF के खिSलाफ कोई संज्ञान नहीं खिलया जा सक ा र्थीा और विन*ले न्यायालयों ने संज्ञान लेने
में गल ी की र्थीी।
12. परिरणामस्वरूप, अपील स्वीकार की जा ी हैऔर संज्ञान लेने वाले आदेश के
सार्थी-सार्थी नी*े के न्यायालयों द्वारा पारिर आदेशों को रद्द कर विदया जा ा है।
………………. न्याया ीश
(अशोक भूषण)
………………. न्याया ीश
(एस अब्दल ु नजीर)
………………. न्याया ीश
(हेमं गुप्ता)
नई विदल्ली।
10 मा*F , 2021
6 यह अनुवाद आर्टिटविफणिशयल इंटेखिलजेंस टू ल 'सुवास'के जरिरए अनुवादक की सहाय ा से विकया गया है।
अस्वीकरण: यह विनणF य वादी के प्रति बंति उपयोग के खिलए उसकी भाषा में समझाने के खिलए स्र्थीानीय भाषा में
अनुवाविद विकया गया है और विकसी अन्य उद्देश्य के खिलए इसका उपयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक
और आति कारिरक उद्देश्यों के खिलए, विनणF य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक होगा और विनष्पादन और कायाFन्वयन के
उद्देश्य से अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।
7
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